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Chartism Movement

 Chartism Movement (1838-57 ई)

चार्टिस्ट आंदोलन राजनीतिक सुधार एवं अधिकारों की प्राप्ति के लिए ब्रिटेन में श्रमिकों के द्वारा किया गया एक आंदोलन था जो मुख्य रूप से(1838-57) तक जारी रही थी।

चार्टिस्ट आंदोलन के निम्नलिखित प्रमुख कारण जिनके द्वारा इस आंदोलन की शुरुआत हुई-
The following major causes of chartist movement.

1. श्रमिकों का नगरों में आना तथा उनका  शोषण होना और कठिन जीवन एक महत्वपूर्ण कारण है।
2. ब्रिटेन में समाजवाद का प्रसार होना चार्टिस्ट आंदोलन की पृष्ठभूमि को मजबूत करता है था।
3. 1832 ईसवी के सुधार अधिनियम से असंतोष प्रजा।

इस आंदोलन का नाम 1838 के पीपुल्स चार्टर पर रखा गया या एक राष्ट्रीय स्तरीय आंदोलन थी या आंदोलन मुख्य रूप से उत्तरी इंग्लैंड, पूर्वी मिडलैंड स्टेफोर्डशायर staffordshier एवं दक्षिणी वेल्स की घाटियों में फैला था। या आंदोलन 1839-1842 ईस्वी एवं 1848 ईसवी में अपने चरम पर पहुंचा। जब 3 वर्षों में लाखों श्रमिकों के द्वारा प्रार्थना या मांग पत्र पर हस्ताक्षर करके हाउस ऑफ कॉमंस (house of commons ) के पास भेजा गया। इसकी मुख्य नीति अपनी मांगों के पक्ष में जन समर्थन का प्रदर्शन करना था इसलिए इन्होंने लाखों की मात्रा में हस्ताक्षर किए। प्रार्थना पत्र एवं बड़ी बड़ी जनसभाओं के द्वारा प्रदर्शन किया गया।
इन के माध्यम से ही वे राज्यसभा एवं संसद पर दबाव बनाना चाहते थे इनका मुख्य उद्देश्य सभी वयस्कों के लिए मताधिकार प्राप्त करना रहा था इस प्रकार चार्टिस्ट आंदोलन कारी संवैधानिक विधि से अपनी मांगों एवं उद्देश्यों की पूर्ति करना चाहते थे।
किंतु दूसरी ओर इन श्रमिकों में कुछ ऐसे लोग देते जो हिंसात्मक उपायों का भी सहारा लिए थे ऐसी हम साथ में गतिविधि दक्षिण बेल्स एवं यॉर्क शायर (yorkshire ) के क्षेत्र में देखा गया था। 

1838 ईस्वी में प्रथम मांग पत्र पीपुल्स चार्टर के कुल 6 महत्वपूर्ण माँगे थी। इनका दावा था कि इसे लागू करने से इंग्लैंड की प्रजातांत्रिक व्यवस्था और सुदृढ़ और मजबूत हो जाएगी।
अतः ये 6 मांगे निम्न निम्नलिखित है-

So these 6 demands are as follows-

1. प्रत्येक 21 वर्ष की अवस्था के वयस्क मताधिकार दे दिया जाए, जो व्यक्ति मानसिक रूप से स्वस्थ हो तथा जो किसी आपराधिक गतिविधि मैं संलिप्त नहीं पाया गया हो या सजा काट रहा हो।

2. दूसरा महत्वपूर्ण मांग मतदाता की सुरक्षा के लिए गुप्त
मतदान प्रणाली प्रारंभ की जाए का पक्षधर था।

3. संसद सदस्य की योग्यता के लिए निर्धारित संपत्ति की अनिवार्यता पूर्ण रूप से समाप्त कर दी जाए।

4. संसद सदस्यों को भुगतान या वेतन दिया जाए, जिसे निर्धन व्यक्ति भी अपने जीवन यापन के संघर्ष और संकट से बाहर निकल कर राष्ट्रहित तथा राष्ट्र के कल्याण के लिए राजनीति में योगदान दे सकें।

5. प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र के प्रतिनिधि को समान अधिकार प्रदान किया जाए किसी को भी भाराआत्मक प्रतिनिधित्व नहीं दिया जाए।

6. चुनाव प्रत्येक वर्ष करवाया जाए ऐसा चुनाव में रिश्वतखोरी अध्ययन बल का प्रयोग रोकने के लिए किया गया था क्योंकि कोई भी धनी व्यक्ति जहां पर सभी वयस्क मताधिकार हो केवल 12 महीने की अवधि के लिए भारी रकम खर्च कर प्राप्ति नहीं खरीद सकता था।

चार्टिस्ट आंदोलन कारी राजनीति में वयस्क भ्रष्टाचार की समाप्ति तथा औद्योगिक समाज में वास्तविक अर्थ में प्रजातंत्र की स्थापना के लिए ऐसी मांगे उठा रहे थे। किंतु इन से ज्यादा प्रभावित आर्थिक कारणों के कारण क्रांतिकारी वर्ग भी हुआ अर्थात क्रांतिकारी भी आगे आने लगे। क्योंकि इस दौरान लोग बेरोजगारी तथा वेतन में कटौती से परेशान थे।

वस्तुतः 1832 के सुधार अधिनियम पारित होने के बावजूद जिसमें संपत्ति की अनिवार्यता के कारण मताधिकार का विस्तार नहीं हो सका था जिसे यह संदेश गया कि श्रमिक वर्ग के साथ मध्यम वर्ग ने धोखेबाजी की है। स्थापना को इंग्लैंड में विंग (wing ) मंत्रिमंडल के कार्यों से और ज्यादा बल प्राप्त हुआ।
इस सरकार ने 18 से 34 ईसवी में एक कानून पारित किया जिसकी आम लोगों ने बहुत आलोचना है व्यक्ति जहां पर श्रमिकों के द्वारा इस कानून के द्वारा श्रमिक वर्ग को कार्य की दशा को लेकर आपत्ति थी।

इस कानून के खिलाफ 1830 के दशक में इंग्लैंड में व्यापक आक्रोश एवं विरोध फैलता चला गया।
लोगों ने चार्ट इस आंदोलन को अपना पूर्ण समर्थन दिया था था या आंदोलन धीरे-धीरे एक जन आंदोलन बनता चला गया लोगों के हृदय अंदर बेरोजगारी, वेतन में कटौती के द्वारा उत्पन्न ज्वाला ने धीरे-धीरे अपना आक्रोश दिखाया।
(Dorothy thompson ) डोरोथी थॉमसन के अनुसार इस परिस्थिति में श्रमिक वर्ग या महसूस करने लगे कि केवल मताधिकार प्राप्ति के उपरांत ही उनकी स्थिति में सुधार हो सकती है।

1836 ईस्वी में विलियम लोकेटट (william lovette)
के द्वारा लंदन कार्यरत श्रमिक सभा की स्थापना की गई इस सभा ने दक्षिण -पश्चिम इंग्लैंड में चार्टिस्ट आंदोलन कार्यों को एक आधार प्रदान करने का कार्य किया। वहीं दूसरी और वेल्स में चार्टिश आंदोलनकारियों की मजबूती 18 से 36 ईसवी में स्थापित होने वाली Carmarthen करमार्थं श्रमिक सभा की स्थापना के साथ ही मानी जा सकती है।

राष्ट्रीय एवं स्थानीय स्तर पर कई पत्र-पत्रिकाओं के माध्यम से या आंदोलन जारी रहा जिसकी विक्रय एवं प्रसार भारी मात्रा में हो रही थी।
इस प्रकार द नॉर्थन स्टार ( The northernstar) नामक समाचार पत्र जिसका प्रकाशन 2837 में प्रारंभ हुआ सर्वाधिक लोकप्रिय रही थी जिसकी 50000 कॉपियां की बिक्री होती थी अन्य प्रमुख समाचार पत्रों में नॉर्थन लिबरेटर (northern liberator ) महत्वपूर्ण रही थी।
ऐसे पत्र-पत्रिकाओं में चार्टिश आंदोलन के मांगो को जायज ठहराया जाता था तथा आंदोलन कार्यों की रूपरेखा की भी जानकारी इन्हीं के माध्यम से लोगों को दी जाती थी। 1838 में चार्टिस्ट आंदोलन कई नगरों मैं सभाओं के आयोजन से की गई ऐसी बड़ी सभा में लगातार बर्मिंघम, ग्लास्कोव तथा उत्तरी इंग्लैंड के नगरों में आयोजित की गई थी।
एक अत्यंत बड़ी सभा का आयोजन 24 सितंबर 1838 ईस्वी को लंका शायर के रर्सल ( Rersal ) मोड में आयोजित की गई थी। जिसमें पूरे देश के आंदोलनकारियों ने अपनी सहभागिता दर्ज की थी। तथा इन वक्ताओं ने वयस्क मताधिकार के पक्ष में बहुत सारे तर्क दिए थे।
जॉन बेट्स ने लिखा है चार्टिश आंदोलनकारियों ने 1839 में लंदन में राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया जहां पर एक मांग पत्र बनाई गई और इसमें तेरा लाख श्रमिकों के हस्ताक्षर लिए गए। इस मांग पत्र को संसद के निम्न सदन के पास भेजा गया।

किंतु हाउस ऑफ कॉमन ( house of common ) ने इनकी मांगों को ठुकरा दिया। इस दौरान यॉर्कशायर एवं वेल्स में उद्योगों में आए हड़ताल प्रारंभ करने पर चर्चा की गई।


न्यूपोर्ट विद्रोह (newport rebel)


इस आंदोलन के दौरान कई जगहों पर हिंसा भड़क उठी। इसके परिणाम स्वरूप कई चार्टिश नेताओं को गिरफ्तार किया गया। इस मुकदमों के दौरान एक प्रमुख चार्टिस नेता ( john prost) जॉन प्रोस्ट ने एक बयान दिया इस बयान के द्वारा ऐसा प्रतीत होता था कि इस ने आंदोलनकारियों को हथियार उठाने की सलाह दी है। आता कई स्थानों पर जैसे दक्षिणी वेल्स में चार्टिश आंदोलनकारियों ने हत्यारों के साथ जुलूस निकाले तथा इस आंदोलन को जन आंदोलन के रूप में बदल देने की योजना बनाई गयी। 3 या 4 नवंबर 1839 को जॉन प्रॉस्ट कई आंदोलनकारियों के साथ न्यू पोर्ट स्थित वेस्टगेट होटल की और जुलूस निकाली उसकी योजना न्यू पोर्ट नगर पर कब्जा कर रहा के स्तर पर विद्रोह का प्रारंभ करना था।
उसने वेस्टगेट होटल पर अपना नियंत्रण स्थापित कर लिया। तुरंत ही कार्यवाही करते हुए ब्रिटिश सेना ने वेस्टगेट होटल को चारों तरफ से घेर लिया। इसके उपरांत दोनों पक्षों की ओर से गोलीबारी की गई। चार्टिस्ट आंदोलन कार्यों को सेना के दबाव में पीछे हटना पड़ा।
इस गोली कांड में लगभग 20 की संख्या में चार्टिश आंदोलनकारी मारे गए तथा 50 से अधिक घायल हुए।
वास्तव में न्यूपोर्ट विद्रोह राष्ट्रीय स्तर पर विद्रोह प्रारंभ किए जाने का एक संकेत था। इसके परिणाम स्वरूप चार्टिस्ट आंदोलन 1842 तक ब्रिटेन के अलग-अलग हिस्सों में जारी रही। जॉन प्रोस्ट को गिरफ्तार किया गया। जॉन प्रोस्ट F. Oconnor (ओकोन्नोर ) के नेतृत्व में रिहा करने के लिए सरकार के पास प्रार्थना पत्र भेजा।

चार्टिस्ट आंदोलन कारियों ने विद्रोह करने का प्रयास किया। sheffield मैं विद्रोहियों का नेतृत्व सैम्यूल samuel Helbery ने किया वहीं ब्रॉड फोर्ड (bradford ) में नेतृत्व रोबोट पेड्डी कर रहे थे। किंतु सेना ने इन दोनों विद्रोह को कुचल डाला इन दोनों नेताओं को लंबी अवधि तक कारावास में दे दिया गया।

Helbery कि जेल में की मृत्यु हो गई और वह आंदोलनकारियों के लिए शहीद एवं प्रेरणा स्रोत बन गए।
मई 1842 में अपनी मांगे के साथ चार्टिस्ट आंदोलनकारियों ने एक और प्रार्थना पत्र बनाया इसके साथ ही इस बार इन्होंने 3 लाख आंदोलनकारियों का हस्ताक्षर लिया तथा इस मांग पत्र को ब्रिटिश संसद को सौंप दिया किंतु संसद ने पुणे इस मांग पत्र को खारिज कर दिया।
1842 में अर्थव्यवस्था में मंदी का दौर आया इसके परिणाम स्वरूप वेतन में कटौती के कारण लगातार हड़तालओं का दौर प्रारंभ हुआ।
इन हड़ताल के दौरान वेतन में कटौती की समाप्ति के मांग के साथ-साथ चार्टर में उठाए गए मांगों को पूरा उठाया गया।
इस दौरान इंग्लैंड के 14 एवं स्कॉटलैंड के 8 स्थानों पर आम हड़ताल का आयोजन किया गया इनके द्वारा चार्टिस आंदोलनकारियों के द्वारा उठाए गए मांगों को कानूनी रूप देने की मांग को दोहराई गई आम हड़ताल स्कॉटलैंड से यॉर्कशायर की और तेजी से फैलती चली गई। सरकार ने सेना को इनके खिलाफ लगा दिया।
अतः सैनिक दबाव के कारण सितंबर 1842 तक श्रमिक धीरे-धीरे अपने काम पर लौटने लगे।
किंतु बड़ी संख्या में चार्टिस्ट नेता जिसमें Ocomnor भी शामिल था गिरफ्तार कर लिया गया।
किंतु किसी नेता पर भी गंभीर अपराध का आरोप नहीं लगाया गया तथा वैसे आंदोलनकारी जिन पर अत्यंत साधारण आरोप था। उन पर कभी मुकदमा भी नहीं चलाया गया। कारागार से मुक्त किए जाने के उपरांत
Ocomnor ने एक नया सिद्धांत दिया।

इनके अनुसार भूमि का स्वामित्व प्राप्त होना श्रमिकों की सभी समस्याओं को समाप्त कर देगी।

ओ कॉमनर के इस विचार के अनुसार एक चार्टिश सरकारी भूमि कंपनी की स्थापना की गई।
श्रमिकों को इस कंपनी के शेयर देने के लिए आमंत्रित किया गया।
तथा कंपनी प्राप्त होने वाले इस धन से भूमि खरीदी जाती ऐसी खरीदी गई भूमि को दो या 3 एकड़ के छोटे-छोटे भूखंडों में विभाजित किया जाता।
18 से 44 से 48 के बीच इस कंपनी के द्वारा पांच गाड़ी भूखंड को खरीद लिया गया। इन भूखंडों को छोटी छोटी इकाइयों में विभाजित कर लाटरी के माध्यम से शेयर धारक आदमियों के बीच बांट दिया गया।
किंतु इस योजना की वित्तीय दायित्व एवं सफलता में संदेह को देखते हुए संसद ने जांच बैठाया तथा इस योजना को बंद करने के उद्देश्य दे दिया।

1847 के चुनाव में F.Ocomnor संसद के सदस्य निर्वाचित हो गए किंतु कई चार्टिस नेताओं ने चुनाव को अलोकतांत्रिक कहते हुए इस्तीफा दे दिया इस समय यूरोप में 1848 की क्रांति हो गई अता चार्टिस्ट आंदोलन पुनः चलने लगा। 10 अप्रैल 1848 ईस्वी को F. Ocomnor ने एक नया सम्मेलन( चार्टिस्ट सम्मेलन ) आयोजित किया।
इसके उपरांत चार्टिस्ट आंदोलन कार्यों की गतिविधियों में काफी तेजी देखी गई। सरकार ने अपनी तरफ से इन पर नया देश- विद्रोह कानून लागू कर दिया और बड़ी संख्या में आंदोलनकारियों को गिरफ्तार किया कई लोगों को ऑस्ट्रेलिया भेज दिया गया था 18 सो 58 ईस्वी में अंतिम सम्मेलन में काफी कम संख्या में वे लोग शामिल हुए

इस आंदोलन की समाप्ति के समय तक जोंस एवं जूलियन इसके प्रमुख नेता के रूप में रहे थे कुछ नेता इस आंदोलन को समाजवादी दिशा देना चाहते थे।


चार्टिस्ट नेता चर्च के भी खिलाफ है क्योंकि चर्च को राज्य के द्वारा जो अनुदान दिया जा रहा उसका सामान वितरण चर्च नहीं कर रहा था। चार्टिस्ट आंदोलन कारी राज्य एवं चर्च के भी खिलाफ है क्योंकि चर्च को राजा के द्वारा जो अनुदान दिया जा रहा था उसका सामान वितरण चर्च नहीं कर रहा था। चार्टिस्ट आंदोलनकारी राज्य एवं चर्च के बीच कोई संबंध नहीं चाहते थे।
इन आंदोलनकारियों को आरंभ में कोई सफलता नहीं मिली। क्योंकि 1918 ईस्वी तक वार्षिक मताधिकार नहीं हो सका। वार्षिक चुनाव प्रणाली भी नहीं लागू की गई अतः ब्रिटेन के चार्टिस्ट आंदोलन को श्रमिक दल की शुरुआत मानी जा सकती है।



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