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 युवा गृह क्या है? What is dormitory?


भारतीय जनजाति संस्कृति की अनेकों विशेषताओं में से एक विशेषता युवा गृह का प्रचलन है, यह जनजातिय भारत के प्रत्येक गांव में किसी न किसी रूप में अवश्य पाया जाता है इसे अलग-अलग जनजाति के लोग अलग-अलग नामों से जानते हैं और पुकारते हैं। उदाहरण के लिए जैसे धूमकुड़िया, गिटिओरा, गोथुल इत्यादि। हम सभी जानते हैं कि सामाजिकरण में सबसे पहली भूमिका परिवार की आती है परिवार के पश्चात पड़ोस की आती है लेकिन जब एक व्यक्ति किशोरावस्था प्राप्त कर लेता है तब वह सामुदायिक जीवन में प्रवेश करता है।



युवा गृह सांस्कृतिक पारंपरिक ज्ञान का सृजन केंद्र दर्शन सामाजिक जुड़ाव पारंपरिक प्रशासनिक व्यवस्था और इन सबसे ऊपर जीवित रहने का एक महत्वपूर्ण केंद्र तथा पूर्वजों से सीखने का केंद्र इत्यादि है। किशोरावस्था के बाद उसे समुदाय में रहकर परिवार बसाकर गृहस्ती भी चलाना पड़ता है। समुदाय के सदस्य होने के नाते उसे समुदाय की कला गीत संगीत अस्त्र-शस्त्र की विद्या के संबंध में जानना जरुरी होता है साथ ही साथ समुदाय की सुरक्षा के उपायों को समझना उसके लिए अनिवार्य होता है क्योंकि वह बड़ा हो जाता है अतः अपने माता-पिता के साथ एक ही कमरे में सो नहीं सकता। अतः जनजाति गांव में युवाओं को पारिवारिक जीवन सामुदायिक जीवन कलात्मक जीवन एवं सुरक्षात्मक जीवन व्यतीत करने संबंधित ज्ञान अर्जित करने के लिए युवक ग्रहों का निर्माण किया जाता है। यहां अविवाहित युवकों को आपस में बातचीत करने का पूरा अवसर मिलता है । गांव का वरीय सदस्य उन पर नियंत्रण रखता है उन्हें वहां पारिवारिक एवं ग्राम जीवन के संबंध में शिक्षा देते हैं l यहां युवक गीत संगीत अस्त्र शस्त्र विद्या इत्यादि का प्रशिक्षण पाते हैं। कुछ जनजातीय गांव में युवकों तथा युवतियों के लिए एक ही युवा ग्रह होता है इसे ड्रिलिंग ए युवा गृह (bisexual dormitory) के नाम से जाना जाता है। इस स्थिति में युवक गिरी का संचालन एवं नियंत्रण किसी वरीय पुरुष या महिला के पास ही होता है। अधिकांश जनजाति गांव में युवकों एवं युक्तियों के लिए अलग-अलग युवक ग्रह होते हैं इसे एक लिंगी युवा गृह (unisexsual dormitory) कहा जाता हैं ।



युवागृह नामक संस्था एवं संगठन के माध्यम से जनजातीय समाज अपने युवा सदस्यों को अपनी परंपरा , प्रथा , रीति - रिवाज , विश्वास , संस्कृति इत्यादि की शिक्षा प्रदान करता है । अत : सांस्कृतिक परंपराओं , प्रथाओं एवं रिवाजों को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुंचाने में युवागृहों की भूमिका अत्यंत महत्त्वपूर्ण रही है ।

युवा गृहों को विभिन्न जनजातियों के बीच विभिन्न नामों से जाना जाता है । उदाहरण के लिए मुंडा तथा हो जनजातियां इसे गिटिऔरा कहती हैं । उरांव जनजाति के मध्य युवागृह को धमखुरिया कहा जाता है । बोडो जनजाति इसे सोलानी डिगो कहकर पुकारती हैं । भोटिया के बीच युवागृह रंग - बंग नाम से जाना जाता है ।

नागा जनजाति युवागृह को मोरूंग कहते हैं । गारो जनजाति के बीच युवा संगठन को नोकपाते के नाम से जाना जाता है । भुइया जनजाति युवागृह को धनगरवासा कहते हैं । सेमीनागा लड़कियों के युवा संगठन को इलोइची तथा लड़कों के युवा संगठन को इयूदची कहते हैं । मध्य प्रदेश को गौंड इसे गोटुल कहते हैं ।

युवागृह के प्रकार - योन अवस्था को देखते हुए युवागृहों का विभाजन दो प्रकार में किया जा सकता है -
1 . एक लैंगिक युवागृह ( Monosexual Youth Dormitory ) तथा
2. द्विलैंगिक युवागृह ( Bisexual Youth Dormitory )
एक लैंगिक युवा गृह - इसमें लड़कों तथा लड़कियों के लिए अलग - अलग युवागृह होते हैं । उदाहरण के लिए सेमीनागा जनजाति । इस जनजाति में लड़कियों के लिए अलग युवागृह तथा लड़कों के लिए अलग युवागृह की व्यवस्था रहती है ।

द्विलैंगिक युवागृह - इसमें लड़कों तथा लड़कियों के लिए एक ही युवागृह होते हैं । उदाहरण के लिए मध्य प्रदेश की गाँड जनजाति । गौंड जनजाति में लड़कों तथा लड़कियों के लिए एक ही युवागृह पाया जाता है जिसे गोटुल के नाम से जाना जाता है ।
युवा गृह क्या है? What is dormitory?
संरचना की दृष्टि से युवागृह की निम्नलिखित विशेषताएं पाई जाती हैं
1. युवागृह जनजातीय गांवों में गांव के मध्य अथवा किनारे में बना एक गृह होता है ।
2. युवागृह का निर्माण घास - फूस , डाली , पत्तियां , बांस इत्यादि के सहारे किया जाता है ।
3. युवागृह के निर्माण में सभी युवक एवं प्रौढ़ सदस्य भागीदारी दशति है ।
4. युवागृह में अविवाहित लड़के या लड़कियां अथवा दोनों रात्रि में निवास करते है ।


 5. कोई - कोई जनजातियों में लड़का - लड़की के लिए अलग - अलग युवागृह पाए जाते हैं , जबकि कुछ जनजातियों में दोनों लड़का तथा लड़की के लिए एक ही युवागृह पाए जाते हैं ।

 6. युवागृह की सदस्यता चार - पांच वर्ष के पश्चात् ग्रहण प्राप्त करने के पहले बच्चे अपने - अपने माता - पिता के साथ रहते हैं । 
7. युवागृह में विवाहित स्त्री - पुरुषों का प्रवेश वर्जित होता है । 
8. लेकिन विधवा अथवा विधुर होने पर वे पुनः युवागृह में प्रवेश पा सकते हैं । 
9. युवागृह के उत्सवों में ग्राम के अन्य सदस्य भी भाग लेते हैं ।
 10. युवागृह में प्रवेश के पूर्व एक समारोह का आयोजन किया जाता है । 
11. लड़कों के युवागृह का संचालन किसी पुरुष तथा लड़कियों के युवागृह का संचालन किसी महिला के अधीन रहता है । 
12. युवागृह के सदस्य आयु के आधार पर वरीय एवं कनीय के बीच विभाजित रहते हैं । 
13. कनीय सदस्य वरीय सदस्यों की आज्ञा का पालन करते हैं । 
14. युवागृह की सदस्यता विवाह पूर्व तक बनी रहती है , विवाह के बाद युवागृह की सदस्यता स्वत : समाप्त हो जाती है । 
15. युवागृह के सदस्य भोजन अपने घरों में करते हैं । शाम में भोजन करने के उपरांत वे युवागृह में इकट्ठा हो जाते हैं ।
 16. युवागृह के सदस्य अंधकार फैल जाने पर युवागृह के बाहर आग जलाते हैं , वहां कथा - कहानी सुनते एवं सुनाते हैं , गीत गाते हैं और नृत्य भी करते हैं । उसके बाद रात्रि विश्राम करते हैं । 

17. युवागृह में मनोरंजन के साथ - साथ सामाजिक - सांस्कृतिक रिवाजों , सामूहिक जीवन के नियमों , सामाजिक गुणों , सामाजिक कर्तव्यों एवं दायित्वों इत्यादि के संबंध में प्रशिक्षण दिया जाता है । 

18. युवागृह के सदस्य युद्ध यंत्रों के चलाने का प्रशिक्षण भी प्राप्त करते हैं तथा रात्रि के समय अपने गांव की रक्षा करते हैं । 
19. युवागृह में वाद्य यंत्र , युद्ध यंत्र , शिकार यंत्र इत्यादि रखे रहते हैं । 
20. युवागृह के सदस्य गांव समाज के सामूहिक कार्यों में विशेष भागीदारी दर्शाते हैं ।
 21. युवागृह को टोटम चिन्हों से सजाकर रखा जाता है तथा उसे सीमाबद्ध कर दिया जाता है ।
 22. युवागृह के सदस्यों से आशा की जाती है कि वह युवागृह के क्रियाकलापों को गुप्त रखेगा ।




 युवागृह की उत्पत्ति के संबंध में विचार - युवागृह की उत्पत्ति के संबंध में अनेक मानवशास्त्रियों द्वारा अपने - अपने विचार व्यक्त किए गए हैं । उनके विचारों के आधार पर युवागृह की उत्पत्ति के संबंध में निम्नलिखित कारण सकते हैं 1. प्रसिद्ध मानवशास्त्री एलविन के अनुसार युवागृह की उत्पत्ति का मुख्य कारण जनजातीय समाज के युवा पीढ़ी को जीवन साथी चयन करने का अवसर प्रदान करना तथा यौन - शिक्षा देना रहा होगा । मध्य प्रदेश की मुरिया गौंड में प्रचलित गोटुल का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा है कि युवागृहों में प्रेमालाप तथा यौन क्रियाएं होती हैं । यही कारण है कि गोटुल की क्रियाकलापों को गुप्त रखा जाता है । गोटुल में संभोग की स्वतंत्रता रहती है लेकिन गर्भ रहना उचित नहीं माना जाता है । मुरिया लोगों में यह विश्वास प्रचलित है कि गोटुल के देवता लिंगों से संभोग करेंगे पर गर्भ नहीं ठहरने देता है । 
2. हट्टसन , मजुमदार तथा राय ने एलविन के मत को अस्वीकार कर दिया है । इन विद्वानों के अनुसार युवागृह की उत्पत्ति का कारण जनजातीय युवा पीढ़ियों में सांस्कृतिक , सामाजिक , आर्थिक , धार्मिक , जादुई तथा राजनीतिक क्रियाकलापों का प्रशिक्षण देना रहा होगा ।
 
3. युवागृह की उत्पत्ति का एक कारण युवा शक्ति चनात्मक कार्यों में लगाया जाना रहा होगा । 

4. युवागृह की उत्पत्ति का कारण सामाजिक सहयोग का विकास तथा सामूहिक जीवन के गुणों को विकसित करना रहा होगा । 
5. युवागृह पर्व - त्योहार मनाने के उद्देश्य से भी अस्तित्व में आया होगा ।

 6. युवागृह मनोरंजन के लिए अस्तित्व में आया होगा । 

7. अतिथियों को ठहराने तथा मनोरंजन प्रदान करने के उद्देश्य से भी युवागृह की उत्पत्ति हुई होगी । 8. आर्थिक क्रियाकलापों को गति प्रदान करने के उद्देश्य से युवागृह की उत्पत्ति संभवतः हुई होगी ।
 9. सामाजिक एवं सामूहिक जीवन को बनाए रखने के उद्देश्य से युवागृह अस्तित्व में आया होगा । 

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